गोंडा की मार्मिक घटना: मां को मौत की नींद से जगाता रहा मासूम, नहीं पसीजे लोगों के दिल

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गोंडा की मार्मिक घटना: मां के शव के साथ घंटों भूखा-प्यासा बैठा रहा मासूम, फिर मिली मदद

गोंडा: जिसका कोई नहीं उसका ख़ुदा है यारो, मैं नहीं कहता किताबों में लिखा है यारों….. उक्त पंक्ति जनपद गोंडा में उस समय चरितार्थ होते दिखी, जब एक असहाय मां और उसके मासूम बेटे की मदद के लिए स्थानीय हिंदू संगठनों ने हाथ बढ़ाया।

दरअसल, हुआ यूं कि एक महिला अपने सात वर्षीय मासूम के साथ इलाज के लिए अस्पताल पहुंची और अचानक उसकी मौत हो गई। मृत महिला के साथ मासूम के अलावा कोई नहीं था, लगभग 24 घंटे तक वह मासूम अपनी मां को मौत की नींद से जगाने की जद्दोजहद में लगा था, लेकिन उसे यह नहीं पता कि उसकी मां हमेशा के लिए सो गई है।

कई घंटों तक यही क्रम चलता रहा “मासूम अपनी कभी न उठने वाली माँ को जगाता और जब वह न उठती तो रोने लगता”  लेकिन अस्पताल में कोई उस मासूम को ये समझाने वाला नहीं था कि अब उसकी मां कभी उठेगी नहीं। सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का परिणाम यह हुआ कि जब मृत महिला के शव से दुर्गंध उठने लगी तब जाकर उसकी जानकारी लोगों को मिली… मामले की जानकारी पर पहुंचे स्थानीय सामाजिक संगठनों ने महिला का अंतिम संस्कार करवाया और मासूम को सहारा दिया।

जानकारी के अनुसार, अयोध्या जनपद के मया बाजार क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय गीता देवी अपने सात वर्षीय बेटे अर्पित के साथ किराये के मकान में रह रही थीं। कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही गीता देवी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उस समय उनके साथ केवल उनका छोटा बेटा मौजूद था। जो किसी से मदद की राह देखता रहा लेकिन सरकारी तंत्र ने उसकी कोई मदद नहीं की।

माँ के शव के पास भूखा-प्यासा बैठ रहा मासूम, बंद कमरे से आने लगी दुर्गंध ​

जिले के एक रिहाइशी इलाके में एक महिला अपने 7 साल के बेटे के साथ किराए के मकान में रह रही थी। महिला की अचानक तबियत बिगड़ने गई तो वह अपने 7 वर्षीय बेटे के साथ अस्पताल पहुंच गई, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मासूम बेटा जिसे मौत का मतलब भी नहीं पता था वह पूरे दिन से रात तक मां के शव के पास ही बैठा रहा। वह बार-बार मां को जगाने की कोशिश करता लेकिन कोई हलचल न होने पर रोने लगता। ​घटना के लगभग 24 घंटे बीत जाने के बाद जब कमरे से तेज बदबू आने लगी, तब जाकर आसपास के लोगों को अनहोनी का अहसास हुआ। हालांकि इसके बावजूद न तो सरकारी तंत्र जागा और न ही कोई भी मदद के लिए आगे आने को तैयार नहीं था।

सामाजिक संगठनों ने बढ़ाया मदद के लिए हाथ

घटना की सूचना मिलने पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले डरे और भूखे बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, भोजन कराया और उसकी देखभाल की व्यवस्था की। इसके बाद पुलिस को सूचना देकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई गई।

​मासूम बेटे ने कांपते हाथों से दी मुखाग्नि

महिला के किसी परिजन के सामने न आने पर स्थानीय लोगों और संगठनों के सहयोग से अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई। श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया, जहां सात वर्षीय अर्पित ने कांपते हाथों से अपनी मां को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

​माँ के जाने के बाद चुनौती बना बच्चे का भविष्य

मां के साये से महरूम हो चुके इस मासूम का अब इस दुनिया में कोई सहारा नहीं बचा है। सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति (CWC) से मांग की है कि बच्चे के रहने, खाने और पढ़ाई-लिखाई की उचित व्यवस्था की जाए। फिलहाल कुछ स्थानीय लोग और सामाजिक संस्थाएं बच्चे की देखरेख की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आए हैं।

​यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग एक तरफ समाज की इस बेरुखी की निंदा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ समय पर पहुंचकर बच्चे की मदद करने वाले युवाओं की सराहना कर रहे हैं।


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